Sinhapura : Dweep Desh ki Pravasi Kavita (सिंहापुर : द्वीप देश की प्रवासी कविता )

Sinhapura : Dweep Desh ki Pravasi Kavita (सिंहापुर : द्वीप देश की प्रवासी कविता )

by Edited by Chitra Gupta, Sandhya Singh (सम्पादक : चित्रा गुप्ता, संध्या सिंह )

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  • ISBN: 9789362879639
  • Binding: Hardcover
  • BISAC Subject(s): Health & Yoga
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2025
  • Pages: 94
  • Original Price:Rs. 695.00
  • Language: Hindi
यह काव्य-संग्रह साधारण संग्रह नहीं है, बल्कि यह सिंगापुर के विशद प्रवासी साहित्य का जीवन्त दस्तावेज़ है। यह सिंगापुर का ऐसा पहला काव्य-संग्रह है, जिसमें 27 कवियों को शामिल किया गया है, यानी लगभग इसमें हर वह कवि शामिल है, जिसने अपने भावों को शब्दों में उतारकर काव्य बुना हो। यह संग्रह एक गतिमान मंच है, जहाँ अनुभवी और नवोदित कवियों की कविताएँ एक साथ मिलकर इस प्रदेश के साहित्य की सुन्दरता को नये आयाम दे रही हैं। यह संग्रह उन कवियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो सिंगापुर में रहते हुए भारतीय संस्कृति और परम्पराओं से जुड़े हैं, और अपनी रचनात्मकता से उसे अभिव्यक्ति दे रहे हैं। इनकी कविताओं में प्रवासी जीवन की चुनौतियाँ, सांस्कृतिक समन्वय और वैश्विक दृष्टिकोण का अद्भुत मिश्रण है। कई कविताएँ हमें भीतर झाँकने, तो कई जीवन की छोटी-बड़ी बातों को नये नज़रिये से देखने के लिए प्रेरित करती हैं। यह विभिन्न कवियों की अनूठी शैलियों और दृष्टिकोणों का समागम है। यह इस छोटे-से द्वीप देश की हिन्दी साहित्यिक धरोहर को नयी पहचान देता है। इन कविताओं में व्यक्तिगत अनुभवों के साथ-साथ सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति भी है। इस संग्रह में विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े रचनाकार हैं, उनके अनुभव और कार्यों की छाया उनकी कविताओं में परिलक्षित होगी। समसामयिक विषयों पर कवि तथा कवयित्रियों ने अपनी लेखनी चलायी है। कविताओं में अनेक रसों एवं भावों का समावेश है। कुछ कवियों की कविताओं को सम्भवतः प्रथम बार पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है, जो उनके लिए पाठक वर्ग तक पहुँचने में एक सुगम मार्ग सिद्ध हो सकता है। कविताओं के पीछे हिन्दी भाषा के विकास और उन्नति की भावना छिपी है। यह संकलन हिन्दी साहित्य को लोकप्रिय करने का एक स्वप्न है एवं यह भी भरोसा है कि हिन्दी कविता का भविष्य नये उत्साही और मँजे हुए रचनाकारों के साथ उज्ज्वल है। हम आशा करते हैं कि 'सिंहापुरा' काव्य-संग्रह को जहाँ-जहाँ भी हिन्दी भाषी प्रेमी हैं, वहाँ-वहाँ इसे सराहना मिलेगी। -चित्रा गुप्ता ★★★ कहते हैं न, हर चीज़ के लिए नियत समय होता है और सम्भवतः यही समय है जब सिंगापुर के कवियों के रचना-संसार में विविधता को इस संग्रह के माध्यम से देखा जा सके। इन अभिव्यक्तियों में कहीं देश की याद है तो कहीं प्रवास की महक, किसी ने भोजन को माध्यम बनाया है तो किसी ने अपने कक्ष को माध्यम बनाकर अपनी भावनाएँ प्रकट की हैं। कहीं बोलियों के रस-भरे रिश्ते को भाषाई आवरण में जोड़ने की सुन्दर चेष्टा है, कहीं ईश्वर से वार्तालाप है तो कहीं स्मृति से स्मृति में प्रवेश करने का भाव। कहीं उम्मीद की क़लम ने अन्तरात्मा से साक्षात्कार कराया है तो कहीं नारी व प्रेम की धाराएँ फूटी हैं। विषय, भाव, काव्य-विधा, लेखन शैली विविधता से भरे हैं जो इस छोटे-से देश में अपरिमित सम्भावनाओं के संसार की ओर इंगित कर रहे हैं। ये कविताएँ अपने शब्दों के माध्यम से संवेगों और भावों को बयाँ करने में समर्थ हैं। -संध्या सिंह

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