Sampadan-Kala : Siddhant Se Vyavahar Tak (सम्पादन-कला : सिद्धान्त से व्यवहार तक )
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- ISBN: 9789373480480
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2026
- Pages: 54
- Original Price:Rs. 325.00
- Language: Hindi
प्रस्तुत पुस्तक 'सम्पादन-कला सिद्धान्त से व्यवहार तक' में सम्पादन के शिल्प और सौन्दर्य को रेखांकित किया गया है। सम्पादन वस्तुतः अनूठी कला और अप्रतिम कौशल है। सम्पादन का तात्पर्य केवल पाठ्य सामग्री में से अशुद्धियों को दूर करना मात्र नहीं है। यह तो पाठ्य-सामग्री के प्रबन्धन, चयन और प्रस्तुति की सम्पूर्ण प्रक्रिया को अपने आप में समेटे हुए है। प्रस्तुत पुस्तक में सम्पादन की इसी व्यापकता को अक्षरित किया गया है। इस पुस्तक में सम्पादन की परिकल्पना, सम्पादन-कला, सम्पादन के सिद्धान्त, सम्पादकीय विभाग का ढाँचागत स्वरूप, शीर्षक लेखन का शिल्प और सौन्दर्य, सम्पादन का शिल्प-विधान, सम्पादन-प्रक्रिया तथा पृष्ठ-सज्जा और अभिकल्प जैसे अध्यायों को शामिल कर इसे छात्रोपयोगी तो बनाया ही गया है, मीडिया प्रोफ़ेशनल्स और मीडिया प्राध्यापकों के लिए भी यह पुस्तक अत्यन्त प्रयोज्य है।
मैं वाणी प्रकाशन, दिल्ली के स्वामी-संचालक श्री अरुण माहेश्वरी जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस पुस्तक की सुन्दर और सर्व शुद्ध छपाई कर हमें अनुगृहीत किया है।
—अरुण कुमार भगत
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