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Samagra Bhartiya Patrakarita (Set of 3 Books) (समग्र भारतीय पत्रकारिता (3 खण्डों का सेट))

by Vijaydutt Sridhar (विजयदत्त श्रीधर)

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  • ISBN: 9789373481722
  • Binding: Paperback
  • BISAC Subject(s): Medical
  • Publisher: Vani Prakashan(Shakshra Prakashan)
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2026
  • Pages: 16
  • Original Price:Rs. 5,500.00
  • Language: Hindi
भाग - 1 समग्र भारतीय पत्रकारिता पहली सदी : 178-188 यह भारतीय पत्रकारिता का आधार ग्रन्थ है। हिन्दी में भारतीय पत्रकारिता का यह पहला सन्दर्भ ग्रन्थ है। इसे पत्रकारिता का पुराण भी माना जा सकता है। ऐसा पुराण जिसमें कथा तो है किन्तु काल्पनिकता की जगह यथार्थपरक घटनाएँ हैं। भारतीय पत्रकारिता के अतीत के अध्ययन के लिए यह पुस्तक एक इतिहास ग्रन्थ भी है, शोध ग्रन्थ भी है और आलोचनात्मक ग्रन्थ भी है। तथ्य की ठोस आधारभूमि पर पत्रकारिता की तत्वगत यात्रा के लिए इसमें रास्ते की पोषक खुराक भी उपलब्ध है, जिस पर चलकर पाठक इसे अनुभव कर सकते हैं। पत्रकारिता के राही इसे साथ रखें तो उन्हें तथ्य, तत्व और उसकी खुराक हमेशा मिलती रहेगी। —रामबहादुर राय भाग - 2 समग्र भारतीय पत्रकारिता तिलक युग : 1881 -192 अंग्रेजी समेत समस्त भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता का ऐसा प्रत्यक्ष परिचय देने वाली कोई और पुस्तक हिन्दी में तो निश्चित रूप से नहीं है। अन्य किसी भाषा में भी शायद नहीं है। सबसे बड़ी चीज है उसकी परिकल्पना और विषय व्याप्ति। इस बात को भारतीय पत्रकारों और पत्रकारिता के विद्यार्थियों को हृदयंगम कराना बहुत जरूरी है कि चार-छह एंग्लो-इंडियन अखबारों को छोड़कर अंग्रेजी समेत तमाम भारतीय पत्र-पत्रिकाओं की अंतरवस्तु एक है और उसे एक ही महानदी या महानद समझकर उसका अध्ययन किया जाना चाहिए। इस अनूठे उपक्रम ने हम सबको सदा के लिए ऋणी बना लिया है। यह ऐसा ऋण है जिसे ढोने में सुख और लाभ है। —नारायण दत्त भाग - 3 समग्र भारतीय पत्रकारिता गांधी युग : 1921 -1948 भारतीय पत्रकारिता का इतिहास चंद अपवादों को छोड़कर अदम्य संघर्ष, बलिदान और ध्येयवादी मूल्यों से सिंचित राष्ट्रीयता का इतिहास है। तीन खण्डों में 245 वर्षों की पत्रकारिता के तथ्यों और प्रवृत्तियों को संकलित और विश्लेषित करना निश्चित ही एक असाधारण उद्यम है। इसके महत्व और उपादेयता का क्षेत्र इतना व्यापक है कि मीडिया से जुड़े लोगों में ही नहीं बल्कि इतिहास, राजनीति और संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाले अध्येताओं और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी यह ग्रन्थ नितान्त उपयोगी होगा। —अच्युतानंद मिश्र

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