Renu Se Bhent (रेनू से भेंट )
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- ISBN: 9788170550945
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Hindi
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2015
- Pages: 254
- Original Price:Rs. 350.00
- Language: Hindi
फणीश्वरनाथ 'रेणु' सम्भवतः प्रेमचन्द के बाद दूसरे हिन्दी के कथाकार हैं, जिन्हें गाँव और खेतों से आन्तरिक लगाव है। (दोनों का चाहे-अनचाहे फिल्म क्षेत्र में भी प्रवेश हुआ-अद्भुत साम्य है! किन्तु जहाँ प्रेमचन्द फिल्मों और अपने अन्तिम उपन्यास 'गोदान' में निराशावादी हो गये; इसके विपरीत 'रेणु' की मनोवृत्ति को साहित्य की ही भाँति फिल्म में भी सफलता मिली ।)
यह समान्तर-फमान्तर क्या होता है... साहित्य समाज के समान्तर या समानान्तर नहीं चलता। साहित्यकार किसी स्थिति का दर्शक मात्र नहीं हो सकता। वह स्थितियों को जीता है, उन्हें भोगता है, प्रतिक्रिया करता है।... मैं अपने आपको खोजता हूँ, इसलिए लिखता हूँ। भोगे हुए साहित्य जैसे 'लिटरेरी जारगन' में मेरा विश्वास नहीं। पर लिखता मैं भी वही हूँ, जो देखता हूँ, सोचता हूँ, अनुभव करता हूँ।... आज लेखक आम आदमी को ढूँढ़ रहा है। ... क्या लेखक स्वयं आम आदमी नहीं है!
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