Nirgun Rambhakti Aur Dalit Jatiyan (निर्गुण रामभाक्ति और दलित जातियाँ)
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- ISBN: 9788170555221
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2012
- Pages: 82
- Original Price:Rs. 295.00
- Language: Hindi
"सन् 1958 से 1996 तक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला तथा कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र के हिन्दी-विभागों में अध्यापन, शोध-निर्देशन। हिन्दी, संस्कृत, भोटी भाषा, जर्मनभाषा, रूसीभाषा तथा फ्रेंचभाषा के विभागों की अध्यक्षता, पत्राचार पाठ्यक्रम निदेशालय के डायरेक्टर और गुरु रविदास चेयर के चेयरमैन भी रहे। 36 वर्षों के सुदीर्घ सेवाकाल में विश्वविद्यालय से नीचे की किसी संस्था में कार्य नहीं किया। लेक्चरर (1963), रीडर (1976) और प्रोफ़ेसर (1981) के सभी पदों पर चुनकर आए, व्यक्तिगतं प्रोन्नति (परसनल प्रोमोशन) की सीढ़ी से कभी ऊपर नहीं चढ़े। एम. एम./एम. फिल. के डेढ़ सौ से अधिक और पीएच.डी. के बहत्तर शोधछात्रों-छात्राओं को सफल निर्देशन ।
हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, अपभ्रंश, भोजपुरी, मैथिली, पंजाबी, हरियाणवी आदि भाषाओं और उनके साहित्य का ज्ञान। दर्शन, धर्म, भाषाशास्त्र, समीक्षा, कथा-साहित्य, नाटक, निबंध, जीवनी पढ़ने का चस्का । सुलेख और पत्रलेखन के लिए बहुशः प्रशंसित। मनोरंजन के लिए फ़िल्में देखना, सामाजिक सम्पर्क से बचना, निकम्मे नापसन्द, कामवाले प्रिय ।"
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