Naye Samay Ka Koras  (नये समय का कोरस )

Naye Samay Ka Koras (नये समय का कोरस )

by Rajni Gupta (रजनी गुप्ता )

Ships in 1-2 Days

Choose a Book cover type:

Secure Payment Methods at Checkout

Visa Mastercard Google Pay PayPal UPI American Express ...50+
  • ISBN: 9788193655559
  • Binding: Hardcover
  • Subject: Novel
  • BISAC Subject(s): Sahitya
  • Publisher: Bharatiya Jnanpith
  • Publisher Imprint: Vani
  • Publication Date: NA
  • Release Year: 2021
  • Pages: 208
  • Original Price:Rs. 400.00
  • Language: Hindi
नये समय का कोरस - "अचानक आसमान ने नीले रंग की पूरी बाँहों का परिधान पहन लिया जिसके बीचों-बीच पीले रंग की धारियों से तिलक लगा दिया हो किसी ने जैसे।" ऐसे माहौल में जमा हैं आधुनिक बच्चे जो जवानी की दहलीज़ से अब नीचे उतर रहे हैं। नेहा और उसके स्कूल, कॉलेज, पहले जॉब के साथ इसी वातावरण में इकट्ठे हैं। अपनी ऊँचे तथा व्हाइट कॉलर जॉब से असन्तुष्ट, अपने सभी फ़िक्र को धुएँ में उड़ा देने का जज़्बा है जिनमें। ऐसे आधुनिक जीवन की कहानी को बख़ूबी अपनी समानान्तर भाषा में उकेरा है रजनी गुप्त ने। कथाकार ने अनेक उपन्यास लिखे हैं जिनमें भाषा की विविधता है, यह एक सफल रचनाकार हैं। उपन्यास में उपस्थित खुले मिज़ाज और बड़ी-बड़ी कार्पोरेट संसार में विचरण करनेवाली ख़ुदमुख़्तार स्त्रियाँ अन्दर से कितनी खोखली हैं, इसका ज़िक्र किये बिना नहीं रहती हैं लेखिका। आज के नौनिहाल हर क्षेत्र में महारत हासिल कर रहे हैं पर उनकी ओर सीना फुलाकर देखनेवाले नहीं देख पाते कि उनकी दिक़्क़त क्या है ? विशेष रूप से लड़कियाँ। लड़कियों ने अपने को सिद्ध किया है। अब पहलेवाली पीढ़ी की तरह कोई नहीं कह सकता कि वे कमतर हैं और न कोई यह कह सकता कि लड़की होने के कारण उनका प्रमोशन हो जाता है। परन्तु यह बात परिवार बनाने के लिए भारी है। पति और बच्चे का टास्क लेना वे अफ़ोर्ड नहीं कर सकतीं। नव्या की मुश्किलें देखकर नेहा विवाह के विषय में सोचती तक नहीं। वह उससे कनफेस करती है—"तभी तो मेरी शादी करने की हिम्मत नहीं होती। कितना मुश्किल है मल्टी टास्किंग होना।" अपने आप के लिए समय नहीं। टारगेट पूरे करने में समय हाथ से फिसलता जाता है। एक समय था जब ये सभी सात साथी कहते थे, अपना सपना मनी मनी, मनी हाथ में आ जायेगा तब सब कुछ पूरा हो जायेगा, लेकिन अब तो आलम ये है कि जाने कितने अरसे सीता मार्केट की चाट नहीं खायी, साथ बैठकर ज़ोर से ठहाके नहीं लगाये। नये समय का कोरस है यह जो संकेत देता है भयानक विखंडन का। आकांक्षाओं के आकाश छूने वाले थके पंछियों का। रजनी गुप्त ने उनकी डोर तो अपने हाथों में रखी है परन्तु आकाश की निस्सीमता बेहद लुभावनी है। नव-युवाओं के लिए प्रेरक है यह उपन्यास— नये समय का कोरस। कथाकार इस कोरस को सँभाल ले जाती हैं कि एक भी सुर नहीं छूटता। — उषाकिरण खान, पद्मश्री वरिष्ठ कथाकार

Author information not available.

Trusted for over 24 years

Trusted for over 24 years

Family Owned Company

Secure Payment

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Need Support?

Whatsapp Us

Bestselling

View All
Goutam Biswas
₹178 ₹200 (- 11 %)
B.S. Hari Shankar
₹623 ₹700 (- 11 %)
Sushil Kumar Srivastava
₹456 ₹495 (- 7 %)
Neeta Yadav
₹1602 ₹1800 (- 11 %)
Prabodh Kumar Mishra
₹428 ₹480 (- 10 %)
Dilip K. Chakrabarti
₹979 ₹1100 (- 11 %)
Naresh Kumar
₹1335 ₹1500 (- 11 %)
Sujata Miri, Karilemla
₹557 ₹625 (- 10 %)
Alka Tyagi
₹579 ₹650 (- 10 %)
Marta Vannucci
₹579 ₹650 (- 10 %)
G.P. Singh
₹890 ₹1000 (- 11 %)
Charles J. Naegele
₹445 ₹500 (- 11 %)