Mankhanjan Kinke : Madhyakalin Sahitya, Sanskriti Aur Mulyankan (मनखंजन किनके : मध्यकालीन साहित्य-संस्कृति और मूल्यांकन)
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- ISBN: 9789373488370
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): Reference
- Publisher: Nine Books
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2025
- Pages: 400
- Original Price:Rs. 795.00
- Language: English
इस पुस्तक में कुछ मध्यकालीन उलझनों से जूझा गया है।
हिन्दी-साहित्य के 'आदिकाल' में सिद्धों ने एक विचित्र प्रकार की आनुष्ठानिक भाषा के कूटों को विकसित किया था। उन्होंने असौंदर्य-धुरी पर विकराल एवं वीभत्स सौंदर्यबोध का अभिचार भी किया था। उन्होंने समस्त कुलीन-तंत्र तथा आभिजात्य जीवन-शैली से ही पूर्णरूपेण प्रस्थान कर लिया था। पहले अनुभाग में उनके प्रेरक संकेत-शास्त्र को रीतिकाल से बहुत आगे पर चीहा गया है।
इसी तरह सूर की आद्यबिंबात्मक तथा घुमंतू अकुंठ गोप-संस्कृति की यूतोपिया के अन्तर्गत दैवीशिशु के रहस्य-लोकों में मिथकीय एवं अद्भुत अवगाहन किया गया है। 'कृष्ण-लोकवार्ता' में ढूँढे गये अनेक निजंधरों से इतिहास का पुनर्निर्माण भी किया गया है।
इन दोनों आयामों की यात्रा के साथ-साथ 'मूल्यांकन' की एक संपूर्ण अत्याधुनिक प्रक्रिया की रूपरेखा गढ़ी गई है ताकि साहित्य के सिस्टम की जीवंतता अंगीकार हो सके।
अपरिहार्य रूप में यह छोटी पुस्तक नये तथा ताज़े ढंग से एक बड़ी लम्बी यात्रा में आपको सहयात्री बनाए।
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