Lambi Kavitayen Vaicharik Sarokar (लम्बी कविताएँ वैचारिक सरोकार)
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- ISBN: 9788181439703
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Science
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2009
- Pages: 58
- Original Price:Rs. 200.00
- Language: Hindi
"समकालीन कविता के परिप्रेक्ष्य में, लम्बी कविता प्रत्येक कवि के लिए, एक सार्थक और कारगर चुनौती भी बन गयी है; क्योंकि इसके माध्यम से कवि न केवल अपने समय और वे देशकाल में अपना हस्तक्षेप एवं सरोकार सिद्ध करता है, प्रत्युत अपनी सर्जनात्मक-कलात्मक क्षमताएँ भी सिद्ध करता है । किन्तु लम्बी कविता की चुनौती से रचनात्मक धरातल पर निपटने, उसके आन्तरिक अनुशासन को झेलने, उसकी प्रकृति में उतरने के बजाय कुछ अत्यधिक उत्साही महत्वाकांक्षी छोटे-छोटे काव्य-खंडों को एक साथ जोड़कर, अनेक दृश्यों-स्थितियों को मिलाकर लम्बी कविता देने की अपनी साध पूरी कर लेना चाहते हैं। भूल जाते हैं या समझ नहीं पाते कि मात्र आकारगत लम्बाई ग्रहण कर लेने से ही कोई कविता 'लम्बी कविता' नहीं मानी जा सकती। तथ्यों-विवरणों का घाल-मेल, घटनाओं- दुर्घटनाओं का काल्पनिक अनानुभूत वर्णन कर देने से कविता उनके तईं लम्बी हो गई, बस! जबकि लम्बी कविता अपनी प्रकृति, रूप और चरित्रगत विशिष्टता में संयत, बहुआयामी, व्यापक दृश्यफलक लिए हुए, प्रदीर्घ ऐसी रचना है, जो विचारदृष्टि एवं संवेदनात्मक धरातल पर परिवेश से बृहत्तर सरोकार रखती है। गुम्फित यथार्थ के गतिशील रूपों को, वैचारिक अनुभूति की संश्लिष्ट बनावटों को, उनकी उत्कटता में पकड़ने की छटपटाहट है।
हिन्दी की दस लम्बी कविताओं पर यहाँ पृथक-पृथक लिखे गए लेख संकलित हैं। इन कविताओं के अतिरिक्त और भी बहुत-सी कविताएँ हैं, जो लम्बी मानी जा रही हैं जैसे- विजयदेव नारायण साही : अलविदा, ओम प्रकाश निर्मल नींद टूटने से पहले, रमेश गौड़ : पतनगाथा, सुखबीर सिंह : बयान बाहर, मृत्युंजय उपाध्याय : वैश्वानर, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना: कुआनो नदी, कैलाश वाजपेयी : महास्वप्न का मध्यांतर, देवराज : इला और अमिताभ, मोहन सपरा : वक्त की साजिश के खिलाफ आदि । किन्तु अभी यह नहीं कहा जा सकता कि ये सभी कविताएँ श्रेष्ठ लम्बी कविताएँ हैं या लम्बी कविता-धारणा पर कितनी खरी उतरती हैं। वैसे भी अभी तो लम्बी कविता- विधा पर कार्य आरम्भ ही हुआ है। उसके कितने और आयाम खुलें, क्या पता! हमारी ओर से मात्र यह नम्र और पहला प्रयास आपके समक्ष प्रस्तुत है ।"
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