Kante Ki Baat -4 AAGE RASTA BAND HAI (कांटे की बात 4 आगे रास्ता बंद है )
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- ISBN: 9788170557258
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 1998
- Pages: 88
- Original Price:Rs. 395.00
- Language: Hindi
"दर्शन, उपदेश, कला, शब्द और स्वप्न कभी हवा में नहीं होते. वे प्रत्युत्तर, प्रतिक्रिया और प्रतिपक्ष में ही जन्मते-पनपते हैं क्योंकि दोतरफा संवाद के बिना ज़िंदगी को समझना-समझाना संभव नहीं होता. विडंबना यह है कि हम ऐसे माहौल में जी रहे हैं, जहां सफलता, प्रभुत्व, संपर्क जैसे शब्दों की सत्ता है और सिद्धांत, आदर्श, योग्यता जैसे शब्द अर्थ खो चुके हैं, जहां सृजन का अस्तित्व ही संकट में है और स्वस्थ संवाद बनाना न तो संभव ही रहा है, न अभिप्रेत ही. यह ऐसी भयावह स्थिति है जब आगे के सभी रास्ते बंद हैं,
कंहीं से खुली, उन्मुक्त हवा का एक झौंका तक नहीं आता. किताब, पत्रकारिता और फिल्म जैसे माध्यमों के ज़रिए राजेन्द्र यादव ने स्थितियों की इसी जड़ता को तोड़कर एक रचनात्मक संवाद बनाने की कोशिश की है. व्यावहारिक समस्याएं कई हैं-रचने और छपने की, जीविका और प्रकाशन की, पाठक तक पहुंचने की, उससे प्रत्युत्तर पाने की, साहित्यिक और व्यावसायिक पत्रकारिता के द्वंद्व की, बाज़ारू संस्कृति और हिंसा-रोमांस के फिल्मी स्वप्नों को तोड़कर नया यथार्थ गढ़ने की. यह पुस्तक बंद गलियां और अंधे कुएं छोड़कर इन्हीं खुले रास्तों का अनुसंधान करती है जिससे कला और संस्कृति को जीवन और उसके सामाजिक संदर्भों से जोड़ा जा सके और लेखक अपनी पूरी स्वतंत्रता और गरिमा के साथ अपने होने की पहचान को रेखांकित कर
सके. - विद्यानिधि"
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