Jail Aur Swatantrata (जेल और स्वतन्त्रता)
Ships in 1-2 Days
Choose a Book cover type:
Secure Payment Methods at Checkout
- ISBN: 9789373488141
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Tourism
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2026
- Pages: 224
- Original Price:Rs. 695.00
- Language: Hindi
जेल और स्वतन्त्रता की पृष्ठभूमि जेल की सन्नाटेदार दीवारें हैं—जहाँ समय थम-सा जाता है, और मन आत्ममन्थन तथा देश के इतिहास में निरन्तर गहराई तक उतरता चला जाता है। यह उन क्षणों का दस्तावेज़ है जब लेखक केवल घटनाओं का नहीं, बल्कि अपने भीतर उठते संघर्षों का सामना कर रहे थे—जो वैचारिक भी हैं और आध्यात्मिक भी।
विभाजन की त्रासदी, गांधी की उपेक्षा, सत्ता का केन्द्रीकरण, नौकरशाही का विस्तार, दलगत राजनीति के समीकरण और अन्ततः आपातकाल—इन सबको लेखक केवल देखते ही नहीं, बल्कि भीतर तक महसूस करते हैं। इन अनुभवों के बीच वे बार-बार इस प्रश्न से जूझते हैं कि भारत वास्तव में किस दिशा में जा रहा था। यही अनुभूति उनकी भाषा को तीखा भी बनाती है और अत्यन्त मानवीय भी।
इन पत्रों में लेखक अपने समय के बौद्धिकों, मित्रों और नेताओं से संवाद करते हैं—कभी विनम्रता से, कभी तीखेपन से, लेकिन हमेशा एक गहरी चिन्ता, ईमानदार उम्मीद और इस ज़िम्मेदारी के साथ कि इतिहास की निर्णायक घड़ियों में मौन नहीं रहा जा सकता।
यह पुस्तक सत्ता या विरोध की कथा नहीं—एक ऐसे चिन्तक की नैतिक यात्रा है जो नागरिक चेतना को लोकतन्त्र का वास्तविक आधार मानता है। इसी कारण जेल और स्वतन्त्रता, केवल राजनीतिक कृति नहीं, एक आत्मिक और बौद्धिक दस्तावेज़ बन जाती है—और यही विवेक इसे समयातीत बनाता है।
Author information not available.
Trusted for over 24 years
Family Owned Company
Secure Payment
All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted
New & Authentic Products
India's Largest Distributor
Need Support?
Whatsapp Us
Bestselling
View All
₹178
₹200
(-
11
%)
₹623
₹700
(-
11
%)
₹456
₹495
(-
7
%)
₹1602
₹1800
(-
11
%)
₹428
₹480
(-
10
%)
₹979
₹1100
(-
11
%)
₹1335
₹1500
(-
11
%)
₹557
₹625
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹890
₹1000
(-
11
%)
₹445
₹500
(-
11
%)