Ise Phir Se Suniye (इसे फिर से सुनिए)
Ships in 1-2 Days
Choose a Book cover type:
Secure Payment Methods at Checkout
- ISBN: 9788181435583
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Media & Journalism
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2006
- Pages: 304
- Original Price:Rs. 200.00
- Language: Hindi
"जसबीर चावला की कविताएँ काफी दिनों से पढ़ता रहा हूँ। कविताओं और साथ ही साथ लघु कथाओं के क्षेत्र में भी मैं उनकी निरन्तर सक्रियता को उम्मीद की दृष्टि से देखता रहा हूँ। और अब जबकि उनकी यह काव्य पुस्तक प्रकाशित हो रही है तो यह देखकर मुझे प्रसन्नता हो रही है कि मेरी उम्मीद को एक पुख़्ता आधार मिल रहा है। इन कविताओं को पढ़कर मेरे मन पर जो पहला प्रभाव पड़ा वह यह कि इस कवि की काव्य सृष्टि को उसकी लघु कथाओं के समानान्तर रख कर देखा जाना चाहिए। दोनों के शिल्प में एक विलक्षण कसाव और संक्षिप्तता है जो कथ्य को अनावश्यक फैलाव से बचाता है। इस प्रकार इस संक्षिप्ति या मित कथन के द्वारा बात में सहज ग्राह्यता पैदा होती है, जो आज विरल है।
जसबीर चावला जिस अनुशासन से काव्य के क्षेत्र में आये हैं, उसका सम्बन्ध मुख्यतया विज्ञान से है। इसलिए पेशे के लिहाज से वे साहित्य से इतर क्षेत्र के व्यक्ति हैं। यह एक ऐसा तथ्य है, जो मेरे लिए उनकी काव्य-यात्रा को एक अतिरिक्त आकर्षण प्रदान करता है। मेरा मानना है कि साहित्य की समृद्धि के लिए अन्य अनुशासनों से प्राप्त ज्ञान और अनुभव-सम्पदा का अधिकाधिक उपयोग होना चाहिए। प्रस्तुत पुस्तिका का कवि मुझे इसलिए भी दिलचस्प लगता है कि उसकी कविता इस सम्भावना के सीमान्तों को उजागर करती है और मेरे जैसे पाठक के भीतर इस विश्वास को पुष्ट करती है कि कवि की भावी काव्य-यात्रा उस दिशा में और मजबूती के साथ अग्रसर होगी।
'इसे फिर से सुनिए' के रचयिता की एक खासियत यह भी है कि वह हिन्दी काव्य-परम्परा को जानता तो है पर उससे किसी भी स्तर पर आक्रान्त नहीं होता। यहाँ अपनी काव्य-सरणि को खोजने की जो एक सहज बेचैनी है और साथ ही पंजाबी कविता और पंजाब की उर्वर मिट्टी से एक अबाध निकटता भी, यही चीज़ इस कवि के भावी व्यक्तित्व को गढ़ने में प्रमुख भूमिका निभायेगी। इस संग्रह में उसके पुष्ट संकेत मौजूद हैं। इन पन्नों से गुज़रते हुए मुझे जो रचनात्मक आश्वस्ति मिली है उसके आधार पर कह सकता हूँ कि यह काव्य-कृति अपने अभीष्ट पाठक-समुदाय तक पहुँचेगी और उनके साथ एक सहज तादात्म्य स्थापित करने में सफल होगी।
- केदारनाथ सिंह"
Author information not available.
Trusted for over 24 years
Family Owned Company
Secure Payment
All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted
New & Authentic Products
India's Largest Distributor
Need Support?
Whatsapp Us
Bestselling
View All
₹178
₹200
(-
11
%)
₹623
₹700
(-
11
%)
₹456
₹495
(-
7
%)
₹1602
₹1800
(-
11
%)
₹428
₹480
(-
10
%)
₹979
₹1100
(-
11
%)
₹1335
₹1500
(-
11
%)
₹557
₹625
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹890
₹1000
(-
11
%)
₹445
₹500
(-
11
%)