Hans Akela (हंस अकेला )

Hans Akela (हंस अकेला )

by Vineeta Gupta (विनीता गुप्ता)

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  • ISBN: 9789350009680
  • Binding: Hardcover
  • BISAC Subject(s): Fiction
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2012
  • Pages: 150
  • Original Price:Rs. 395.00
  • Language: Hindi
"हंस अकेला की पांडुलिपि को अभी-अभी पढ़कर खत्म किया है महसूस कर रही हैं, पौ फटे का सूरज केवल पूर्व दिशा में ही नहीं जन्मता। उसकी दिशाएँ अनेक रूपों और आकारों में परिवर्तित होती अपनी प्रसव भूमि सिरजती रहती हैं। उन आकारों को हम जिस रूप में देख रहे होते हैं, मात्र वही और उतना ही उसका सच नहीं होता। कभी-कभी यह किसी दिये की कोख से बाती की ती वन कर जन्मता है, तो कभी किसी माँ की कोख तताश किसी भ्रूण की शक्ल अख्तियार कर जन्मने को छटपटा आता है। अन्धकार के प्रतिरोध में ही सूर्य जन्मता है, अन्धकार की अनीति से मोर्चा लेने के लिए। सेठ जयचन्द लाल की पत्नी पाँची देवी की कोख से शिशु रूपा का जन्म दिये की कोख से उसी वाती की लौ का जन्मना है, जिसका जन्म ही अन्धकार के प्रतिरोध के लिए हुआ है। आचार्य तुलसी सरदार शहर पधारे ये चातुर्मास के लिए। विरल बालक रूपा ने जिद ठान ली मुनि दीक्षा लेने की। हंस किसी ठिया बंधकर कैसे रह सकता था। पिता जयचन्द लाल सिंघी उसका हठ देख विचलित हो उठे। बालक रूपा ने पिता से कहा 'जो नियम जबरन दिलवाये जाते हैं या थोपे जाते हैं, उनका पालन करना मुश्किल होता है। लेकिन जब हम अपने आप ही कोई संकल्प लेते हैं तो उसे जीवन भर निभाना मुश्किल नहीं होता... मन्त्री मुनि ने बालक रूपा की अलौकिकता का आभास कर विचलित पिता जयचन्द जी को आश्वस्त किया था 'रूपा के लिए इतनी आशंकाएँ मत पाल। देख, आज यह जिस सिंह-वृत्ति से दीक्षा लेने की बात कर रहा है, यही सिंह-वृत्ति उसे संन्यास के पथ पर आगे तक ले जाएगी।' बालक रूपा दीक्षित होकर मुनि रूपचन्द्र कहलाया और सत्य का यही तपोनिष्ठ महान्वेषक, मानव कल्याण का महा उपासक बनकर आज हमारे समक्ष सत्-असत् में से सत् चुनने और उसके कंटकाकीर्ण मार्ग का अवलम्बन कर मानव जीवन को सार्थक करने की प्रेरणा बन गया है। .... मानव सेवा के उपासक जैन मुनि, कवि मन रूपचन्द्र जी के जीवन पर आधारित यह मुँदे चक्षुओं की चौखट पर दस्तक देने वाली प्रेरणास्पद औपन्यासिक कृति 'हंस अकेला' उन सभी सुधी पाठकों के अन्तर्मन के प्रकोष्ठों में बाती की उजास भरने में सक्षम है- जिनके लिए अन्धकार चुनौती है... - चित्रा मुद्गल"

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