Hamare Sammy Main  (हमारे समय में )

Hamare Sammy Main (हमारे समय में )

by Shahid Anwar (शाहिद अनवर)

Ships in 1-2 Days

Choose a Book cover type:

Secure Payment Methods at Checkout

Visa Mastercard Google Pay PayPal UPI American Express ...50+
  • ISBN: 9789350002841
  • Binding: Hardcover
  • BISAC Subject(s): Mathematics
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2014
  • Pages: 320
  • Original Price:Rs. 200.00
  • Language: English
"यह नाटक महानगरीय परिवेश के मीडिया से जुड़े ग्लैमरस और बौद्धिक चरित्रों की आधुनिक जीवन-शैली के तनावों, संघर्षों, दबावों और अन्तर्विरोधों का जीवन्त प्रस्तुतीकरण करता है। आज के समाज, समय में पति-पत्नी / स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के बदलते समीकरणों एवं मूल्यों का भी रोचक चित्रण नाटककार ने किया है। व्यावहारिक के.के. और सिद्धान्तकारी मुकुल का हालात से जूझते हुए परस्पर एक-दूसरे के ध्रुवों पर पहुँचना नाटकीय है। शाल्कि स्वयं यथार्थ के स्तर पर व्यावहारिक जीवन जीने के बावजूद पति मुकुल को क्रान्तिकारी - सिद्धान्तवादी और आदर्शों का कल्पना-पुरुष ही बनाये रखना चाहती है। मुकुल वास्तविकता के धरातल पर उतर कर एक सामान्य जीवित व्यक्ति की तरह जीने की कोशिश करना उसका मोह भंग करता है और अन्त में वह उसे छोड़कर चली जाती है। शरीर और आत्मा का सन्तुलित सामंजस्य ही अस्तित्व और जीवन है। इनमें से किसी एक स्तर पर जी पाना सम्भव नहीं है। के.के. के ट्रेड यूनियन के सक्रिय कार्यकर्ता रहे पिता का रूस के पतन और लेनिन की मूर्ति को तोड़े जाने की ख़बर सुन कर जीवित लाश भर बन कर रह जाना, और फिर एक दिन अचानक अपने आप ठीक हो जाना और नाटक का ‘झण्डा ऊँचा! झण्डा ऊँचा !' के साथ समाप्त हो जाना – यह अन्त आकस्मिक अवश्य है, किन्तु नाटकीय विडम्बना से भरपूर भी है। यह विडम्बना चरित्रों की भी है, सम्बन्धों एवं स्थितियों की भी और सबसे ज्यादा हमारे समय की भी.... शाहिद अनवर एक प्रखर राजनीतिक नाटककार हैं लेकिन नुक्कड़ नाटक करने के बावजूद वह अपने नाटकों में मुखर भाषणबाजी, नारेबाज़ी और सपाटबयानी से बचते हुए अपने मन्तव्य को नाटक की स्थितियों, संरचना तथा उसके चरित्रों को बड़ी कलात्मकता से पिरो देते हैं। इनके नाटक अलग-अलग रूप-रंग और मुहावरे के बावजूद एक-ध्रुवीय दुनिया के खतरे के प्रति दर्शक/पाठक को सावधान करते हैं। इनकी जीवन्त नाट्य-भाषा चरित्रों के अनुरूप कभी हरकत भरी बोली, कभी छद्म-बौद्धिकता का मुखौटा पहने अंग्रेजी और कभी बोलचाल की बहुअर्थगर्भी हिन्दी के विभिन्न रूप ग्रहण करती चलती है। इनका वाग्वैदग्ध्य इनके संवादों की जान है.... -जयदेव तनेजा"

Author information not available.

Trusted for over 24 years

Trusted for over 24 years

Family Owned Company

Secure Payment

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Need Support?

Whatsapp Us

Bestselling

View All
Goutam Biswas
₹178 ₹200 (- 11 %)
B.S. Hari Shankar
₹623 ₹700 (- 11 %)
Sushil Kumar Srivastava
₹456 ₹495 (- 7 %)
Neeta Yadav
₹1602 ₹1800 (- 11 %)
Prabodh Kumar Mishra
₹428 ₹480 (- 10 %)
Dilip K. Chakrabarti
₹979 ₹1100 (- 11 %)
Naresh Kumar
₹1335 ₹1500 (- 11 %)
Sujata Miri, Karilemla
₹557 ₹625 (- 10 %)
Alka Tyagi
₹579 ₹650 (- 10 %)
Marta Vannucci
₹579 ₹650 (- 10 %)
G.P. Singh
₹890 ₹1000 (- 11 %)
Charles J. Naegele
₹445 ₹500 (- 11 %)