Habba Khatoon Aur Aranimaal Ke Geet-Gaan (हब्बा ख़ातून और अरणिमाल के गीत-गान)
Ships in 1-2 Days
Choose a Book cover type:
Secure Payment Methods at Checkout
- ISBN: 9789350724439
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): Ghazal
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2015
- Pages: 136
- Original Price:Rs. 175.00
- Language: Hindi
कश्मीरी कविता में प्रेमपरक भावधारा प्रवाहित करने का श्रेय हब्बा ख़ातून (1552-1592) को जाता है। उस प्रवाह को जारी रखने और आगे ले जाने का काम किया हब्बा से दो सौ साल बाद कवयित्री अरणिमाल (1738-18 अनुमानित) ने। दोनों के समय और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में अन्तर है, किन्तु प्रणय-जन्य विरह वेदना की उठान में सातत्य है । यथार्थ और भौतिक जीवन की विडम्बना और मृदुल भावनालोक के द्वन्द्व से उनके कंठ से फूटे गीत-गान मौखिक रूप में ही सदियों घाटियों- वादियों, केसर के खेतों, झील में तिरते सिकारों, यानी कश्मीरी सरज़मीं के जर्रे जर्रे में झंकृत होते रहे। कश्मीर की कोयलों के इन गीत-गानों ने न सिर्फ़ लोक संस्कृति को समृद्ध किया, बल्कि आधुनिक कश्मीरी कविता के विकास में भी इनका निर्णायक योगदान है। विडम्बना ही है, कि भारतीय काव्य - परम्परा की इन दो हार्दिक हस्तियों की स्वर - साधना से हिन्दी भाषा साहित्य अब तक अपरिचित रहा आया। सुपरिचित कवि-द्वय सुरेश सलिल और (स्व.) मधु शर्मा के अनुवाद में पहली बार हब्बा ख़ातून व अरणिमाल के अमर गीत हिन्दी में प्रस्तुत किये जा रहे हैं। इन अनुवादों में लय और गीति-तत्व को अक्षुण्ण रखने की भरसक कोशिश की गयी है ।
Author information not available.
Trusted for over 24 years
Family Owned Company
Secure Payment
All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted
New & Authentic Products
India's Largest Distributor
Need Support?
Whatsapp Us
Bestselling
View All
₹178
₹200
(-
11
%)
₹623
₹700
(-
11
%)
₹456
₹495
(-
7
%)
₹1602
₹1800
(-
11
%)
₹428
₹480
(-
10
%)
₹979
₹1100
(-
11
%)
₹1335
₹1500
(-
11
%)
₹557
₹625
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹890
₹1000
(-
11
%)
₹445
₹500
(-
11
%)