Do Sultan, Do Baadshah Aur Unka Pranaya Privesh (दो सुल्तान दो बादशाह और उनका प्रणय-परिवेश)
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- ISBN: 9789352293667
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): History
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2016
- Pages: 468
- Original Price:Rs. 350.00
- Language: Hindi
"मध्यकालीन भारतीय इतिहास अपने-आप में दिलचस्प, आकर्षक और महत्त्वपूर्ण है किन्तु इसके आकर्षण और दिलचस्पी के साथ सत्ता-संघर्ष के षड्यन्त्रों एवं इनके रहस्योद्घाटन के चलते इसका आकर्षण दिन प्रतिदिन बढ़ता ही रहा है। इस्लाम के अनुयायियों द्वारा भारत में सत्ता स्थापित करने के बाद आन्तरिक परिस्थितियों में बड़े परिवर्तन दृष्टिगोचर हुए थे। किन्तु इन परिवर्तनों के पीछे कहीं न कहीं, महिलाओं का योगदान और महत्त्वपूर्ण भूमिका भी रही। किन्तु, चूँकि धर्माधिकारी वर्ग ही साक्षर वर्ग (आलिम) था अतः उन्होंने अपनी संकीर्णता और संकुचित दृष्टिकोण के चलते इसका बहुत ही सीमित उल्लेख मात्र किया है। उसी का असर हमें बाद तक इतिहास-लेखन में दिखता रहा । अतः अब बदलते परिवेश में ज़रूरी ही नहीं यह अपरिहार्य है कि उनके और उनकी भूमिका के साथ न्यायपूर्ण और वास्तविक चित्रण किया जाये !
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के 36 वर्ष के अध्यापन के परिपक्व अनुभव के पश्चात यह उनका मध्यकालीन महिलाओं पर केन्द्रित दूसरा कहानी-संग्रह है। इसमें दो सुल्तानों के रूप में अलाउद्दीन खलजी और शेरशाह के प्रणय-परिणय सम्बन्धों की चर्चा है। इसी प्रकार दो बादशाहों में बाबर स्वाभाविक चयन था किन्तु औरंगज़ेब के इस पहलू को उजागर और रेखांकित करना आवश्यक जान पड़ा ताकि उसके समकालीन ऐतिहासिक परिवेश के साथ भी छेड़-छाड़ न हो और वस्तुपरकता का पूरा ख़याल रखते हुए, पूरा और सही सामाजिक-राजनीतिक परिवेश भी निर्मित हो सके !
इतिहास के अध्ययन-अध्यापन के दीर्घ अनुभव के कारण इसमें कहानीकार द्वारा अलाउद्दीन खलजी, शेरशाह, बाबर तथा औरंगज़ेब से सम्बन्धित सभी ऐतिहासिक स्रोतों को तो खँगाला ही गया है, इसके साथ ही विवरण की वस्तुपरकता जैसी दुर्गम शैली को बनाये रखने का भी निष्ठापूर्ण प्रयास किया गया है।
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