Delhi Darwaza (दिल्ली दरवाज़ा)
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- ISBN: 9788181435408
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2006
- Pages: 60
- Original Price:Rs. 300.00
- Language: Hindi
"दिल्ली दरवाज़ा उपन्यास ज्ञानप्रकाश विवेक का तीसरा उपन्यास है। कथा कोलाज़ और किस्सागोई मिलकर उपन्यास को नई तरकीब और तर्ज अता करते हैं। 'दिल्ली दरवाज़ा' उपन्यास एक ऐसा दरवाज़ा है जिसमें दाख़िल होने पर दिल्ली के विभिन्न चेहरे दिखाई देते हैं। हमारे देखते-देखते दिल्ली के मिज़ाज, रंग-रूप और तहज़ीब में ख़ासा बदलाव आया है। राजधानी के रूप में नज़र आने वाली दिल्ली में अनेक दिल्लिया हैं। उपन्यास इन्हीं कई सारी दिल्लियों के अंतस में झाँकता है।
ज्ञानप्रकाश विवेक ने उपन्यास में एक पात्र ‘किरदार' का सृजन किया है जो दिल्ली के बाशिंदों से टकराता है। यह टकराना कभी विसंगति से टकराना होता है तो कभी किसी विडम्बना से। हर मुक़ाम पर कुछ घटित-सा होता है। हर बार किसी किस्से का जन्म होता है। हर किस्से में महानगर का वह इंसान है जो अकेला होता जा रहा है। वह अपने वर्तमान से संघर्षरत है उससे नाखुश भी है। इसलिए कभी स्मृतियों में पनाह ढूंढता है तो कभी वर्तमान के दरकते सम्बन्धों में।
उपन्यास, आज़मूदा शिल्प की काट करता हुआ नया लहज़ा अख़्तियार करता है। गहरी संवेदना, सूक्ष्म दृष्टि और तपिश भरी जुबान में लिखे गए इस उपन्यास को पढ़ना, दिल्ली की कई सारी छवियों के बीच गुज़रने जैसा है।
"
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