Chuninda Ashaar Bashir Badra (चुनिंदा अशआर बशीर बद्र)
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- ISBN: 9788170551508
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Hindi
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2020
- Pages: 260
- Original Price:Rs. 175.00
- Language: Hindi
इतिसिद्धम -
यह उपन्यास एक ऐसे युवक की कहानी है जो आत्महत्या के कगार तक पहुँच कर वापस आता है। अद्भुत बात है कि यह युवक (आज के घोर अनैतिक युग में) एक नैतिक संकट में फँस कर आत्महत्या करने की बात सोचता है। गिरधर नामक यह युवक अपने एक दोस्त दिवाकर की तरह बनने की कोशिश में अपने पूरे मध्यवर्गीय परिवेश का शत्रु बन जाता है यहाँ तक कि माँ-बाप और भाई भी उससे नफ़रत करने लगते हैं।
ग़रीब माँ-बाप का बेटा दिवाकर बड़ी से बड़ी चुनौती के सामने किस तरह अडिग, सन्तुलित, मर्यादित और हँसमुख बना रहता है, यही गिरधर की खोज का और चरित्र की वैसी ही गरिमा प्राप्त कर लेने के लिए उसके संघर्ष का लक्ष्य है। पर क्या गिरधर ऐसा कर पाता है? क्या वह अपने मध्यवर्गीय मोहपाश और अवसरवाद से मुक्त हो पाता है।
मध्यवर्गीय छद्म नैतिकता और आदर्श तथा वास्तविकता के अन्तर्विरोधों के बीच छटपटाते युवा वर्ग की यह कहानी एक ताज़ा क़लम की विशिष्ट रचना है, जो अभिभूत भी करती है, मर्माहत भी, उबुद्ध भी करती है और आविष्ट भी। और सबसे ऊपर, आज की दुनिया में नैतिकता और अनैतिकता के प्रश्न को खुली आँखों से देखती और दिखाती है। और अन्त में नैतिकता के पक्ष में एक प्रबल तर्क की मीनार बन कर खड़ी होती है।
"यह कृति भारतीय समाज के यथार्थ को पूरी शक्ति और संवेदना के साथ व्यक्त करती है। इसमें मानवीय मूल्यों के प्रति गहरी आस्था और संघर्ष के प्रति चेतना भी है।"
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