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Bhartiya Bhashaon Mein Shrikrishna : Bang-Bhoomi (भारतीय भाषाओं में श्रीकृष्ण : बंग-भूमि)

by Soma Bandyopadhyay (सोमा बंद्योपाध्याय)

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  • ISBN: 9789373484655
  • Binding: Hardcover
  • BISAC Subject(s): History
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2026
  • Pages: 330
  • Original Price:Rs. 750.00
  • Language: Hindi
बांग्ला भाषा में उपलब्ध श्रीकृष्ण अथवा वैष्णव साहित्य एक अथाह महासागर की तरह है, और मैं इसके तट पर खड़े होकर इसके केवल अंजुरी भर माणिक-मोती ही एकत्र कर पायी हूँ। वैष्णव सौन्दर्यशास्त्र और दर्शन से परिचित हुए बिना कोई भी पाठक वैष्णव साहित्य के मन्त्रों का ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता, इसलिए मैंने प्रसंगवश उनकी चर्चा उदाहरण सहित करने की कोशिश की है। अनेक विद्वानों, ऋषियों और भक्तों ने वैष्णव साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की है, अत: ‘मनौ वज्रसमुत्कीर्णे सूत्रस्येवास्ति मे गतिः’। यहाँ उल्लेखनीय है कि स्वयं एक वैष्णव परिवार से होने के कारण श्रीकृष्ण के प्रति बचपन से ही मेरे मन में अनन्त भक्ति एवं श्रद्धा है। ग्रामीण बांग्ला के घर-घर में राधारानी एवं श्रीकृष्ण पूजित होते हैं; कहीं राधा-माधव तो कहीं राधा-गोविन्द के नाम से। हमारे ननिहाल में भी राधा-माधव जी का मन्दिर है। अपनी माता से मैंने सुना है कि हर रविवार को घर में श्रीकृष्ण के नाम-संकीर्तन का आयोजन किया जाता। सिर्फ़ अपने गाँव के ही नहीं, आसपास के कई गाँवों के भक्त भी हमारे आँगन में भीड़ जमाते। मेरी नानी एवं नाना जी हर संध्या भगवद्गीता का वाचन करते थे। माँ को भी यही करते देखा है। अतः ये संस्कार बचपन से ही हमारे भीतर गहरे रूप से समाहित हैं। सोलहवीं शताब्दी में श्रीमद्महाप्रभु के दिव्य जीवन पर केन्द्रित महानता की जो बाढ़ सभी दिशाओं में बही, उसके परिणामस्वरूप बंगालियों ने अपना खोया हुआ आत्मविश्वास एवं अस्मिता पुनः प्राप्त कर ली। उस समय बंगाल के काव्य जगत में अनगिनत कवियों की आवाज़ें गूँज रही थीं। बंगालियों ने भारत को एक अद्वितीय दर्शन और रस-शास्त्र का उपहार दिया है। अपनी इस पुस्तक में मैंने उस युग की नयी चेतना से प्रेरित बंगालियों के विचारों का भी संक्षिप्त परिचय देने का प्रयास किया है। साथ ही साहित्य में श्रीकृष्ण, लोक में श्रीकृष्ण, श्रीकृष्ण की भक्ति परम्पराएँ, श्रीकृष्ण के कथावाचकों की परम्पराएँ, श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थस्थान-संग्रहालय-पर्व और उत्सव, कलाओं में श्रीकृष्ण, सामाजिक और राजनैतिक जीवन में श्रीकृष्ण, श्रीकृष्ण विषयक साहित्य में प्रकृति- माहात्म्य और विज्ञान एवं वर्तमान सन्दर्भ में श्रीकृष्ण का प्रदेय आदि पर भी प्रकाश डालने की कोशिश की है।

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