Aur Yatrayen (और यात्राएं)
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- ISBN: 81814323004
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2012
- Pages: 120
- Original Price:Rs. 175.00
- Language: Hindi
"वृक्ष... कितना अच्छा हो अगर सुदूर भविष्य में भी यह एक प्राकृतिक पहाड़ का रूप ले ले... वृक्षों से हरा-भरा पहाड़... और वह पन्ना अभयारण्य के बाहरी जंगल का ही हिस्सा बन जाये ।
छोटी-सी यात्रा...पर भीतर तक भर देने वाली। लगा जैसे बहुत ज़रूरी थी-और अनायास हो गयी। यहाँ आकर ही समझ में आया कि मेरे अन्तस का कितना महत्त्वपूर्ण भाग था वह जिससे मैं अब तक करीब-करीब अनभिज्ञ था। मैं क्या, हर बाँदावासी की बुनावट का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होती है केन...। बचपन में उसके भीतर कहीं जा बैठती है और बराबर वहाँ बनी रहती है, उसकी जन्मजात क्षेत्रीय कर्कशता को धोती हुई... उसे कोमलता, शान्ति का पुट देती हुई। हमें पता भी नहीं चलता। बड़ी नदियों में शुमार न सही, बड़ा नाम न सही... केन चुपचाप अपना काम किये जाती है-जो तुम्हारे पास आये उसे जीवन दो... (इससे बड़ा कोई और काम हो सकता है क्या !)
और बहना... बराबर बहना, पत्थरों के बीच रास्ता बनाते हुए बहना, गन्दगी से बचकर बहना ।"
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