...Aur Ant Mein Prarthana (...और अन्त मैं प्रार्थना)
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- ISBN: 9788181436009
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Novel
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2017
- Pages: 96
- Original Price:Rs. 300.00
- Language: Hindi
समाज के लघु तत्त्व से लेकर विश्व स्तर पर संपर्क एवं वैचारिक समन्वय का महत्त्वूपर्ण माध्यम अनुवाद है। अतः वर्तमान युग में अनुवाद की महत्ता और उपयोगिता केवल भाषा और साहित्य तक ही सीमित नहीं है, वह हमारी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, और राष्ट्रीय संस्कृति और ऐक्य का माध्यम है, जो भाषायी सीमाओं को पार करके भारतीय चिंतन और साहित्य की सर्जनात्मक चेतना की समरूपता के साथ-साथ, वर्तमान तकनीकी और वैज्ञानिक युग की अपेक्षाओं की पूर्ति कर हमारे ज्ञान-विज्ञान के आयामों को देश-विदेश से संपृक्त करती है।
वास्तव में अनुवाद एक तरफ से राष्ट्रीय एकता एवं विश्व एकता का एक सशक्त माध्यम है। यदि विश्व की सारी भाषाओं के समस्त साहित्य का, हर भाषा में अनुवाद हो जाए तो मानव संपूर्ण रूप से समृद्ध हो जाएगा।
वर्तमान युग में अनुवाद को अधिकाधिक महत्त्व प्राप्त हो रहा है। साहित्य के अतिरिक्त विज्ञान, विधि, तकनीकी, व्यावसायिक, प्रशासन, बैंकिंग, पत्रकारिता तथा सूचनापरक आदि सभी क्षेत्रों में अनुवाद को निरंतर महत्त्व प्राप्त हो रहा है। आम आदमी के लिए यह एक ऐसा सहायक-स्तंभ है जिसके बिना उसकी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती।
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