Andheri Raat Ka Musafir (अंधेरी रात का मुसाफ़िर)
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- ISBN: 9789350726389
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2015
- Pages: 504
- Original Price:Rs. 300.00
- Language: Hindi
"मजाज़ की शायरी पर तो बहस हो सकती है लेकिन उनकी ग़ैर-मामूली शोहरत के बारे में सभी आलोचक एकमत हैं। मजाज़ की ग़ैर-मामूली शोहरत के कई कारण हैं। इसका एक कारण साहित्य का ग़ैर-साहित्यिक मेयार भी है। मशहूर कहानीकार इस्मत चुग़ताई ने लिखा है कि “आहंग (मजाज़ का काव्य संग्रह) जब प्रकाशित हुई तो गर्ल्स कॉलेज की लड़कियाँ इसे अपने सरहाने तकियों में छिपा कर रखतीं और आपस में बैठकर पर्चियाँ निकालती थीं कि हम में से किसको मजाज़ अपनी दुल्हन बनाएगा।” यह एक रूमानी दौर था जिसकी नुमाइन्दगी मजाज़ और उनकी शायरी कर रहे थे । मजाज़ की इस रूमानी शायरी में जब इन्क़लाबियत ने प्रवेश किया तो यह शायरी और भी आकर्षण का केन्द्र बन गयी ।
मजाज़ की शायरी की भाषा-शैली तथा अभिव्यक्ति के तौर-तरीके पारम्परिक हैं। इसके बावजूद यह अपने समय की नयी और नुमाइन्दा शायरी है। प्रगतिशील सौन्दर्यशास्त्र में दिलचस्पी रखने वाले पाठक इस शायरी से अधिक आनन्द उठा सकेंगे। मजाज़ ने न सिर्फ़ यह कि मज़दूरों, किसानों और दबे-कुचले लोगों के लिए नज़्में और गीत लिखे बल्कि उन्होंने औरतों को भी पर्दे से निकालकर इन्कलाब का सुर्ख़ झंडा उठाने के लिए प्रेरित किया। इस सम्बन्ध में उनकी नज़्म 'नौजवान ख़ातून से' का यह शेर जो उस समय बहुत मशहूर हुआ था, आज भी प्रासंगिक है-
तेरे माथे पे ये आँचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था।"
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