Agali Kahani (अगली कहानी )
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- ISBN: 9788170559702
- Binding: Paperback
- BISAC Subject(s): Fiction
- Publisher: Vani Prakashan
- Publisher Imprint: Vani Prakashan
- Release Year: 2010
- Pages: 136
- Original Price:Rs. 200.00
- Language: Hindi
"सुकरात' एक भूतपूर्व शिक्षक है जो हॉलैंड के एक स्कूल में प्राचीन लातीनी साहित्य पढ़ाता था, 'डॉ. स्त्राबो' एक सुविख्यात पर्यटन-लेखक है जिसे लाखों डच सैलानी विदेश यात्राओं का अधिकारी विद्वान मानते हैं, हेर्मान मुस्सेर्ट को मानव-जाति से घृणा है-लेकिन सुकरात और डॉ. स्त्राबो उसी के दो मुखौटे या कायांतर हैं। एक सुबह जब मुस्सेर्ट की नींद खुलती है तो वह पाता है कि वह पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन के एक होटल में लेटा हुआ है जबकि पिछली रात वह अपने देश हॉलैंड में अपने शहर अम्स्टर्डाम के अपने फ्लैट में सोया था। साँसत और हैरत में पड़ा हुआ मुस्सेर्ट अंदाज़ लगाने की कोशिश करता है कि आखिर उसके साथ हुआ क्या है-क्या उसकी मृत्यु हो चुकी या हो रही है और इन अंतिम क्षणों में वह अपना समूचा जीवन स्मरण करता हुआ उसे दोबारा जी रहा है या यह किसी किस्म का रहस्यमय, विचित्र सपना है? इस मृत्युवत् स्वप्न या स्वप्नवत् मृत्यु में मुस्सेर्ट अपने असफल जीवन के अवशेषों और अपनी दो प्रेमिकाओं की सुखद - त्रासद स्मृति- छवियों की अजीबोग़रीब अंतिम यात्रा करता है।
इस धोखादेह ढंग से 'मनोरंजक' तथा 'सहज' लगनेवाले उपन्यास में कोई भी वस्तु वास्तव में वैसी नहीं है जैसी वह प्रतीत होती है। इसमें बुद्धिलाघव न्यूनतम है और इसकी भाषा इतनी पारदर्शी और अगरिष्ठ है कि क्रियापदों में काल-परिवर्तन से अतीत और वर्तमान के बीच उपलब्ध की गई आवाजाही तथा उत्तम पुरुष, द्वितीय पुरुष और अन्य पुरुष के परस्पर कायांतरण से उपजी भँवर एक सुखद, चुनौती भरा अर्थभ्रम उपस्थित करती हैं। 'अगली कहानी' शीर्षक ही इसकी आख्यानात्मकता की ओर संकेत करता है और निस्संदेह इसमें किस्सागोई के कई तत्त्व मौजूद हैं, बल्कि जो यूनानी और रोमक संदर्भ इसमें पिरोए गए हैं वे स्वयं इसके समसामयिक वृत्तांत के संस्करण लगते हैं और बदले में इसे एक आधुनिक प्रतीक-कथा बनाते हैं। सघन और 'वास्तविक' होते हुए भी इसका घटनाक्रम आध्यात्मिक और अधिभौतिक अर्थ लेने लगता है।
सेस नूटेवूम अपनी इस रचना के एक स्तर पर ठेठ यथार्थवादी, ठोस ब्यौरों से भरे हुए और (आत्म-) परिहास तथा (आत्म-) व्यंग्य से लबरेज़ हैं और निर्ममता से अपने कथानायक की चीर-फाड़ करते हैं किंतु उनकी प्रतिभा कभी भी पार्थिव विश्व से ऊपर उठकर ब्रह्मांड की अनंत यात्रा पर निकल सकती है। कृशगात होते हुए भी यह कृति जटिल है, इसकी एक 'काया' के भीतर कई कायाएँ हैं, इसके दर्पणबहुल कक्ष में अनेक प्रतिबिम्ब एक-साथ सक्रिय दिखाई देते हैं। नूटेबूम की कथावस्तु, स्वर और शिल्प से कभी व्लादीमीर नाबोकौफ की याद आती है तो कभी प्रूस्त या फ्रांसीसी गल्पकार जॉर्ज पेरेत्स की, लेकिन उनकी अपनी उपलब्धि यह है कि उन्होंने 'अगली कहानी' में स्मृति की यंत्रणा, मोहभंग की स्वीकारोक्ति तथा मृत्यु के आभास को अभिव्यक्ति दी है।
जर्मनी के शीर्षस्थ आलोचक मार्सेल राइष-रानित्स्की ने सेस नूटेबूम को यूरोप का एक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार कहा है और 'अगली कहानी' को प्रकाशन-वर्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपन्यास माना था। विख्यात उपन्यासकार ए.एस. बाइआट ने लिखा है : ""इतालो काल्वीनो का कहना है कि 'किसी कालजयी कृति को पढ़ना दरअसल एक पुनर्पाठ होता है।' सेस नूटेबूम के हर उपन्यास में यह कालजयी गुण है-वे नूतन और चौंकानेवाले होते हैं, और फिर भी वे तत्काल उस रीति का हिस्सा बन जाते हैं जिससे हम संसार को ग्रहण करते हैं, वे हमारे देखने के तरीके का हिस्सा लगने लगते हैं। नूटेबूम एक ऐसे ग्रल्पस्रष्टा हैं जो गहरी, प्रांजल और उद्विग्नकारी कहानियाँ कहते हैं, और जिस प्रणाली से कहानियाँ हमारे जीवन और विचारों का सारभूत अंश होती हैं उस पर चिंतन करते हैं। वे एक बड़े यूरोपीय लेखक हैं और 'अगली कहानी', जिसे 1993 का यूरोपीय साहित्यिक पुरस्कार मिला है, एक छरहरा शाहकार है.... काल्वीनो ने यह भी कहा है कि कालजयी वे पुस्तकें होती हैं जिन्होंने कभी वह कहना बंद नहीं किया है जो वे कहना चाहती हैं और 'कालजयी शब्द हम उस पुस्तक के लिए प्रयोग करते हैं जो प्राचीन तिलिस्मों की तरह ब्रह्मांड के एक समतुल्य का रूप धारण कर लेती है।' मुझे ऐसी किसी दूसरी आधुनिक कृति का पता नहीं है जिसमें और अधिक सुनिश्चितता से यह गुण हो।"""
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