Adhikar : Mahasamar-2 (अधिकार : महासमर 2 )

Adhikar : Mahasamar-2 (अधिकार : महासमर 2 )

by Narendra Kohli (नरेन्द्र कोहली)

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  • ISBN: 9788170551980
  • Binding: Paperback
  • BISAC Subject(s): Novel
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2017
  • Pages: 270
  • Original Price:Rs. 795.00
  • Language: Hindi
महासमर – अधिकार - 'महाभारत' की कथा पर आधृत उपन्यास 'महासमर' की दूसरी कड़ी 'अधिकार' यशस्वी कथाकार नरेन्द्र कोहली की महत्त्वपूर्ण रचना है। 'अधिकार' की कहानी हस्तिनापुर में पाण्डवों के शैशव से आरम्भ होकर, वारणावत के अग्निकांड पर जाकर समाप्त होती है वस्तुतः यह खण्ड 'अधिकारों' की व्याख्या अधिकारों के लिए हस्तिनापुर में निरन्तर होने वाले षड्यन्त्र, अधिकार को प्राप्त करने की तैयारी तथा संघर्ष की कथा है। राजनीति में अधिकार प्राप्त करने के लिए होनेवाली हिंसा तथा राजनीतिक त्रास के बोझ में दबे हुए असहाय लोगों की पीड़ा की कथा समानान्तर चलती है। सतोगुणी राजनीति तथा तमोन्मुख रजोगुणी राजनीति का अन्तर इसमें स्पष्ट होता है। एक ओर निर्लज्ज स्वार्थ और भोग तथा दूसरी ओर अनासक्त धर्म-संस्थापना का प्रयत्न। दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। 'महाभारत' की कथा में कृष्ण का प्रवेश भी इस खण्ड में हो गया है। प्रख्यात कथाओं का पुनःसृजन उन कथाओं का संशोधन अथवा पुनर्लेखन नहीं होता, वह उनका युगसापेक्ष अनुकूलन मात्र भी नहीं होता। पीपल के बीज से उत्पन्न प्रत्येक वृक्ष, पीपल होते हुए भी, स्वयं में एक स्वतन्त्र अस्तित्व होता है, वह न किसी का अनुसरण है, न किसी का नया संस्करण। मौलिक उपन्यास का भी यही सत्य है। मानवता के शाश्वत प्रश्नों का साक्षात्कार लेखक अपने गली-मुहल्ले, नगर- देश, समाचार पत्रों तथा समकालीन इतिहास में आबद्ध होकर भी करता है, और मानव सभ्यता तथा संस्कृति की सम्पूर्ण जातीय स्मृति के सम्मुख बैठकर भी। पौराणिक उपन्यासकार के 'प्राचीन' में घिरकर प्रगति के प्रति अन्धे हो जाने की सम्भावना उतनी ही घातक है, जितनी समकालीन लेखक की समसामयिक पत्रकारिता में बन्दी हो एक खण्ड-सत्य को पूर्ण सत्य मानने की मूढ़ता। सर्जक साहित्यकार का सत्य अपने काल-खण्ड का अंग होते हुए भी, खण्डों के अतिक्रमण का लक्ष्य लेकर चलता है। नरेन्द्र कोहली का नया उपन्यास है 'महासमर'। घटनाएँ तथा पात्र महाभारत से सम्बद्ध हैं; किन्तु यह कृति एक उपन्यास है आज के एक लेखक का मौलिक सृजन!

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