Aacharya Ramanath Jha Rachnawali (5 Volume Set) (आचार्य रामनाथ झा रचनावली (5 खण्ड का सेट))

Aacharya Ramanath Jha Rachnawali (5 Volume Set) (आचार्य रामनाथ झा रचनावली (5 खण्ड का सेट))

by Edited By Mohan Bhardwaj (सम्पादक - मोहन भारद्वाज)

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  • ISBN: 9789350002100
  • Binding: Paperback
  • BISAC Subject(s): Autobiography
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Release Year: 2010
  • Pages: 16
  • Original Price:Rs. 5,000.00
  • Language: Hindi
"एहि में विद्यापति सँ सम्बद्ध रचना अछि। विद्यापति मैथिलीक कालजयी रचनाकार छथि। आचार्य रमानाथ झाक सर्वाधिक प्रिय कवि । तेँ विद्यापतिक कविते पर नहि, हुनक सभ कृति पर ओ विचार कयलनि अछि। विद्यापतिक प्रसंग आचार्य रमानाथ झाक सम्पूर्ण लेखन एहि खण्ड में संगृहीत अछि । विद्यापति केँ बुझबाक लेल ई आधार प्रस्तुत करैत अछि। आँखि दैत अछि। प्रस्तुत खण्ड मैथिली साहित्य सँ सम्बद्ध अछि। मैथिली साहित्यक इतिहास, साहित्य-लेखनक स्थिति आ विकासक दिशा, शोध आ समीक्षाक माध्यम सँ रचना ओ रचनाकार केँ बुझबाक सामर्थ्य – एहि खण्डक खास विशेषता थिक । आचार्य रमानाथ झाक दृष्टि साहित्यक अतीत आ वर्त्तमान पर जतेक छनि ताहि सँ बेसी ओकर भविष्यक लेल ओ आकुल-व्याकुल छथि । तेसर खण्ड मे आचार्य रमानाथ झा लिखित मिथिला ओ मैथिली भाषा विषयक रचना अछि। साहित्यक अध्ययन आ लेखन ताधरि संभव नहि अछि जाधरि भूगोल, माटि-पानि, समाज आ ओकर संस्कृति, अर्थ-व्यवस्था एवं शासन-प्रशासन केँ हृदयंगम नहि कयल जायत। मिथिला जनपद आ एकर भाषिक स्थितिक इतिहास एवं वर्त्तमान पर आचार्य रमानाथ झाक विचार-विमर्श एहि खण्डक विषय-वस्तु अछि । खण्ड चारि मे आचार्य रमानाथ झाक विविध लेखन संकलित अछि । जेना, हुनक बाल-साहित्य । किन्तु, एहि मे हुनक उद्यन-कथा, वररुचि-कथा एवं अलयीकुल-प्रकाश नामक महत्त्वपूर्ण पोथी सेहो सम्मिलित कयल गेल अछि । आचार्य रमानाथ झाक कथाकार कथाकार तथा शोध- अनुसंधानकर्ताक परिचय एहि सँ प्राप्त होइत अछि । दुनू कथा - पोथी हुनक संस्कृत भाषा-साहित्यक अध्ययन अनुशीलनके साकार करैत अछि। गुरु गोविन्द सिंह अनुवाद-कृति - थिक । विषय-वस्तुतँ सहजेँ, एकर भाषा-प्रवाह सेहो मुग्धकारी अछि । ई खण्ड संस्कृत भाषा - साहित्यक रचना पर केन्द्रित मिथिलाक तंत्र-साहित्यक सम्पादन- क्रम मे लिखित भूमिकाक संकलन थिक । एहि सँ पोथीक महत्ताक ज्ञान होइत अछि । पुरुष-परीक्षाक अनुवाद मैथिली मे तँ अछिए, किछु कथाक अंग्रेजी अनुवाद सेहो अछि । कालिदास रचित 'अभिज्ञान शाकुन्तलम्' मैथिल-पाठ पहिल बेर प्रकाशित भेल अछि ।"

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