हे! नवभारत निर्माता डॉ. अम्बेडकर [भाग-1 नव-भारतोदय] (Hey! Navbharat Nirmata Dr. Ambedkar [Part-1 Nav-Bharatodya])
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- ISBN: 9789353249724
- Binding: Hardcover
- Subject: History
- BISAC Subject(s): Reference
- Publisher: Kalpaz Publications
- Publisher Imprint: Gyan Books
- Publication Date: NA
- Release Year: 2022
- Pages: 332
- Original Price:Rs. 990.00
- Language: Hindi
पुस्तक के बारे में हे! नवभारत निर्माता डॉ. अम्बेडकर भाग-1 नव-भारतोदय उल्लेखित ग्रंथ में बीस अध्याय हैं। भीम में नवभारत निर्माता का चरित्र अंकित है। विश्व लीडर में इस ग्रंथ के नायक की वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। तृतीय अध्याय में कलाप्रेमी आंबेडकर के भाष्यकार डॉ. अंगने लाल द्वारा उध्दृत बाबासाहेब के संस्मरण हैं। न्याय सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक में भारत के नागरिकों द्वारा संकल्पित राष्ट्रीय ध्येयों के प्राप्त करने का मंसूबा है। भारत की चुनाव प्रणाली में आदर्श चुनाव पध्दति पर अनुशंसा की गई है। भारत का संविधान आमुख के संक्षेप में प्रस्तुत है। असत् अचित् अआनन्द के बौध्दमत को प्रकट करने वाला सातवा अध्याय असच्चिदानन्द है। बोधिदु्रम बोधिवृक्ष की महत्ता दर्शाता है। राजनीतिक माध्यम से भी किस प्रकार सामाजिक आजादी साकार की जा सकती है की चर्चा इसमें निहित है। डॉ. अम्बेडकर जन्मस्थली के लिए मूरल लगाने हेतु म. प्र. राज्य के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक मूरल समिति गठित की गई थी। उसमें इस पंक्ति के लेखक डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर विश्वविद्यालय के द्वारा अनुमोदित विषय विशेषज्ञ के रुप में समिति के सदस्य थे। तब उनके द्वारा जो चयनित मूरल चित्रों का संग्रह प्रस्तुत किया गया था, उसीका कमोबेश संकलन दसवे अध्याय जन्म स्थली के मूरल केप्शन (भित्तीचित्रांकन) में प्रस्तुत है। मौर्य अंतिम सम्राट बृहदरथ की शुंगवंशीय ब्राह्मण सेनापती पुष्यमित्र द्वारा हत्या करने के बाद मौर्योत्तर बौध्द राजवंश का ऐतिहासिक विवरण इस अध्याय में है। बौध्द जनसंख्या की विश्व में बदलती झलक इस दौर में उपलब्ध स्रोत के आधार पर अंकित है। डॉ. अम्बेडकर के संदर्भित उध्दरण प्रायः नही मिलते हैं। डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली के सूचनानुसार महु विश्वविद्यालय पीठ के प्राध्यापक के नाते इसे बनाया गया और इसे सामाजिक न्याय मासिक के संपादक को भी उपयोग हेतु भेजा गया था, जिसे डॉ. अम्बेडकर के उद्धरण शीर्षक से यहां भी शुमार किया गया है। पाटलिपुत्र से कौशाम्बी, भरहुत, उज्जेनी बुध्दकालीन व्यापार मार्ग था। बाद में सांची की भांति भरहुत में बनाये गये स्तूप पर बुध्द-जीवनी उत्कीर्ण की गई। उसे बौध्द धरोहर की पहचान भरहुत के रुप में चौदहवे अध्याय में रखा गया है। वैचारिक आजादी और वास्तविकता में अमूर्त स्वतंत्रता का स्वप्न और उसका प्राप्त वास्तविक साकार रुप का ब्योरा इसमें प्रस्तुत है। क्रान्ति-वैज्ञानिक में बौध्दिक विचारों के सामाजिक प्रतिमानों को प्रस्तुत किया गया है। बौध्द-तत्वज्ञान और भारतीय संविधान में विद्यमान भारत के संविधान पर प्राचीन बौध्द पालि ग्रंथ विनय पिटक का प्रभाव दर्शाया गया है। प्रास्ताविक नामक अध्याय चार्वाक विचारधारा पर लिखे गए ग्रंथ की प्रस्तावना है। बाबासाहेब की जन्मस्थली के बारे में लिखित अध्याय का नाम महूः डॉ. आंबेडकर के संदर्भ में है। वह नामक कविता प्रस्तुत लेखक द्वारा मां पर लिखी गई है। आशा है उक्त आलेखों का समग्र यह नव-भारतोदय ग्रंथ भाग-1 समस्त बुध्दिजीवी पाठकों को वैचारिक खाद्य के रुप में उपयुक्त सिध्द होगा जैसा कि प्रबुध्द-भारतोदय ग्रंथ भाग-2
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