पञ्चगतिदीपनी (Pancagatidipani) मूल पालि, हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या (Pali Text, Hindi Translation and Exposition)
Ships in 1-2 Days
Choose a Book cover type:
Secure Payment Methods at Checkout
- ISBN: 9788124612873
- Binding: Hardcover
- BISAC Subject(s): Buddhism Studies
- Publisher Imprint: D.K. Printworld
- Pages: xxxii, 263
- Original Price:Rs. 750.00
- Language: Hindi
पञ्चगतिदीपनी पालि ब्रह्माण्डीय साहित्य (Pāli Cosmological Literature) का एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। मुख्यतः पञ्चगतिदीपनी बौद्ध-संस्कृत ग्रन्थ षड्गतिकारिका का पालि भाषान्तर है। परम्परा के अनुसार बौद्ध महाकवि अश्वघोष को षड्गतिकारिका का रचनाकार माना जाता है। भारत में इस ग्रन्थ का सम्बन्ध वात्सीयपुत्रीय-सम्मितीय सम्प्रदाय से था। कालान्तर में नौवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच षड्गतिकारिका का चीनी, तिब्बती, एवं पालि में भाषान्तर किया गया। षड्गतिकारिका का भाषान्तर पालि में सबसे पहले छगतिदीपनी के नाम से बारहवीं शताब्दी के आसपास म्यांमार (बर्मा) में किया गया। पुनः इस ग्रन्थ को थेरवाद परम्परा-सम्मत बनाने के लिए छगतिदीपनी से पञ्चगतिदीपनी के रूप में पुनरुद्धार किया गया। सम्प्रति पाँच कण्ड में विभाजित पञ्चगतिदीपनी में 114 गाथाएं हैं। इस ग्रन्थ का मुख्य विषय नरक, पशु, प्रेत, मनुष्य, और देव नामक पाँच गतियों में कर्म के आधार पर होने वाले प्राणियों के जन्म का कारण तथा वहाँ होने वाले सुख और दुःख को सरल भाषा, पारलौकिक विषय-वस्तु, एवं कुछ अतिरजनाओं के साथ बतलाना है। प्रस्तुत आलोचनात्मक संस्करण पञ्चगतिदीपनी का देवनागरी पाठ, हिन्दी अनुवाद, टिप्पणी, मूल स्रोत, एवं भूमिका के रूप में पालि ब्रह्माण्डीय साहित्य पर एक विशद विवरण प्रस्तुत करता है।
Author information not available.
Trusted for over 24 years
Family Owned Company
Secure Payment
All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted
New & Authentic Products
India's Largest Distributor
Need Support?
Whatsapp Us
Bestselling
View All
₹178
₹200
(-
11
%)
₹623
₹700
(-
11
%)
₹456
₹495
(-
7
%)
₹1602
₹1800
(-
11
%)
₹428
₹480
(-
10
%)
₹979
₹1100
(-
11
%)
₹1335
₹1500
(-
11
%)
₹557
₹625
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹579
₹650
(-
10
%)
₹890
₹1000
(-
11
%)
₹445
₹500
(-
11
%)